रविवार, 29 अगस्त
लखीसराय के कजरा-चानन इलाके में कबैया थाना के दारोगा को एक खुफिया जानकारी मिली कि कुछ नक्सली बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं... फिर क्या था कजना थाना के दारोगा ने अपनी पूरी टीम, बीएमपी के जवानों को लेकर नक्सलियों की तलाश में निकल पड़े....सीआरपीएफ की टीम पिछे से कवर देने वाली थी लेकिन वो समय पर नहीं पहुंची...जैसे ही पुलिसकर्मी नक्सलियों के इलाके में पहुंचे उनपर फाइरिंग शुरू हो गई....जवाब में पुलिसकर्मियों ने भी गोली चलाई...लेकिन इस मुठभेड़ में कबैया थाना प्रभारी समेत दस जवान शहीद हो गये और चार जवान बंधक बना लिये गये...जिसमें रूपेश कुमार, अभय यादव, एहसान खान और लुकसे टेटे शामिल थे।
सोमवार, 30 अगस्त
सोमवार को मुठभेड़ वाले जगह से पुलिस ने सभी शहीदों की लाश बरामद की.... और बंधक जवानों के बारे में उन्हें पुख्ता जानकारी मिली की ये लोग नक्सलियों के चुंगल में है...घायल जवानों को ईलाज के लिए पीएमसीएच में भर्ती कराया गया.... शाम होते होते नक्सलियों की तरफ से बंधक बनाए गये चार जवानों की रिहाई के लिए आठ नक्सलियों को छोड़ने की मांग की।
मंगलवार, 31 अगस्त
नक्सली प्रवक्ता अविनाश ने मीडिया के जरिये....अपने उन आठ साथियों की सूचि सरकार तक भिजवाई जिनको छोड़ने की मांग की जा रही थी....ये आठ नक्सली थे...(gfx) अशोक पासवान, नित्यानंद चौरसिया, प्रमोद कुमार बर्नवाल, अर्जुन कोड़ा, रितु कोड़ा उर्फ अशोक कोड़ा, प्रेम भैया उर्फ सेंगल, रमेश टिर्की उर्फ अजय, रामविलास ताती....इन नक्सलियों को छोड़ने के लिए नक्सली प्रवक्ता अविनाश ने सरकार को बुधवार शाम चार बजे तक का समय दिया।
बुधवार, 1 सितंबर
बुधवार शाम चार बजे तक तक नक्सलियों की ओर से आई पहली अल्टीमेटम के खत्म होने तक सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की गई...इस समय तक साधना न्यूज़ ने सभी नक्सलियों को सकुशल रिहा कराने की अपनी मुहिम शुरू कर दी....औऱ इसी मुहिम का हिस्सा था जब हमने चारो जवानों के सकुशल होने की खबर चलाई और सबूत में उनके उस ऑडियो टेप को भी प्रसारित किया जिसमें बंधक जवानों ने अपने सकुशल होने की खबर दी थी.....बुधवार शाम को नक्सलियों के प्रवक्ता अविनाश से हमारी जो बात हुई थी..उसमें ये कहा गया कि वो पहले अल्टीमेटम को गुरूवार सुबह दस बजे तक बढ़ा रहे हैं।
गुरूवार 2 सितंबर
सुबह दस बजे तक की दूसरी अल्टीमेटम भी खत्म हो गई.... मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नक्सलियों से बात करने को तो राजी थे लेकिन उनसे बात करने को नकस्लियों की तरफ से कोई नहीं आया....दोनों तरफ से असमंजस की स्थिति बरकरार थी....क्या करे क्या न करे.....लेकिन गुरूवार की शाम नक्सली प्रवक्ता अविनाश ने ये दावा किया की सरकार ने उनके अल्टीमेटम की परवाह नहीं की लिहाजा नक्सलियों ने बंधक जवानों में से एक अभय यादव की हत्या कर दी है.... और ये दावा किया की देर शाम तक अभय यादव का शव प्रशासन को मिल जाएगा....लेकिन गुरूवार की देर रात तक कोई शव बरामद नहीं हुआ...सिर्फ अफवाह आती रही....।
शुक्रवार 3 सितंबर
संशय बरकरार था.... साधना न्यूज़ की मुहिम भी लगाता जारी था....लेकिन शुक्रवार सुबह एक खबर ने लाखों लोगों के साथ-साथ साधना न्यूज़ की टीम को भी झकझोर कर रख दिया था.....पंद्रह घंटे पहले हमने जो खबर दिखाई थी...वो गलत साबित हुई....नक्सली प्रवक्ता अविनाश के दावे पर विश्वास करते हुए हमने ये खबर प्रसारित की थी... लेकिन वो खबर गलत हुई... अभय यादव की जगह नक्सलियों ने लुकस टेटे की हत्या कर दी थी... लुकस टेटे झारखंड के सिमडेगा जिले के रहनेवाले थे और बेहद ही गरीब परिवार से आते थे.... नक्सलियों की तरफ से प्रवक्ता अविनाश ने साधना न्यूज़ पर आकर देश की जनता से अभय यादव की हत्या की गलत खबर के लिए माफी मांगी...लेकिन तब तक लुकस टेटे की शहादत से बिहार-झारखंड को लाखों लोग गमगीन हो चुके थे.... मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस खबर से विचलित हो गये और उन्होने सभी दलों को एक मंच पर आकर नक्सलियों से जवानों की रिहाई करने की अपील की...और इसके लिए शनिवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई....।
शनिवार, 4 सितंबर
शनिवार की सूबह से ही सारे देश की नजर नक्सलियों की अगली कार्रवाई और सरकार की ओर से आयोजित सर्वदलीय बैठक के नतीजे पर टिकी हुई थी.... नक्सिलयों की ओर से ये खबर तो आ रही थी...कि अभी तक तीनों जवान सुरक्षित हैं....लेकिन उनकी तरफ से बार-बार ये भी धमकी आ रही थी कि अगर जेल में बंद आठो नक्सलियों को नहीं छोड़ा गया तो वो तीनों जवानों की हत्या कर देंगे.... साधना न्यूज़ की मुहिम जारी थी....शाम को पटना सचिवालय में सर्वदलीय बैठक के बाद सभी दलों ने मिलकर नक्सलियों से सामुहिक अपील की कि वो बंधक जवानों को रिहा कर दे....इसके बाद नीतीश कुमार ने भी नक्सलियों से अपिल किया कि वो जवानों को छोड़ दे....आपको बता दे कि जिस वक्त नीतीश कुमार ये अपील कर रहे थे उसी वक्त साधना न्यूज़ पर नक्सली प्रवक्ता अविनाश उनकी बाते सुन रहे थे....इस अपील को सुनकर नक्सली प्रवक्ता ने साधना न्यूज से कहा कि अब वो अपनी कोर कमेटी की बैठक बुलाएंगे और आगे की कार्रवाई का फैसला करेंगे....शाम साढ़े छह बजे इस बयान के बाद से ऐसा लगने लगा था कि अब कोई अच्छी खबर आने वाली है.... और रात साढ़े नौ बजे हमारे लखीसराय संवाददाता रूपेश भदौरिया को नक्सलियों की तरफ से ये सूचना मिली की उन्होंने बिना शर्त बंधक जवानों को रिहा करने की घोषणा कर दी है.... पिछले सात दिनों में ये पहली अच्छी खबर थी...नक्सलियों के सकुशल होने की पहली खबर हर खबर की तरह सबसे पहले साधना न्यूज़ पर प्रसारित हुई....औऱ देर रात तक हमने ये कोशिश की हर बंधक जवान के परिवार वालों तक ये खबर पहुंच जाए की उनके अपने सुरक्षित हैं।
रविवार, 5 सितंबर
नक्सलियों की ओर से ये घोषणा की गई थी कि रविवार सुबह आठ बजे तक सभी बंधक जवानों को रिहा कर दिया जाएगा.... उधर रविवार की अहले सूबह छह बजे ही खगड़िया में अभय यादव के घर एक एक व्यक्ति पहुंचता है और अपने को नक्सली बताता है.... ये कथित नक्सली अभय यादव की पत्नी रजनी यादव को अभय के छोड़े जाने की खबर देता है.... लेकिन रजनी ने जिस कथित नक्सली के कलाई पर राखी बांधी थी....वो मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति था.....और कुछ महीने पहले रांची के रिम्स में भी इस तरह का नाटक कर चुका था....लेकिन जो भी हो उसकी सूचना किसी मंगल सूचना से कम नहीं था....और वो रजनी के लिए एक दूत बनकर आय़ा था..... सूबह सात से आठ बजे की बीच बंधक जवानों के रिहा होने की खबर थी....लेकिन कहीं से कोई खबर नहीं आ रही थी....वक्त काटना मुश्किल हो रहा था... हमारे लिए भी और सभी बंधक जवानों के परिवार वालों के लिए भी....सुबह से दोपहर हो गई और दोपहर से शाम....लेकिन फिर भी कोई पुख्ता खबर नहीं आई...... किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था, अब क्या होने वाला है....एक बार पहले भी नक्सलियों की ओर से आई एक खबर गलत साबित हुई थी.... और अब फिर उनकी खबर पर शक होने लगा था....शाम से रात हो गई....फिर भी कोई खबर नहीं आई.... ये रात भी गुरूवार की रात की तरह ही काली थी....जब नक्सलियों की तरफ से ये खबर आई थी कि अभय यादव नहीं रहे.... लेकिन किसको क्या पता था कि सोमवार की सुबह एक नया सवेरा लेकर आएगा....जहां पिछले आठ दिनों से छाए गम के बादल नहीं होंगे....बस खुशियां होगी....जवानों के घर लौटने की....आने वाली ईद की....रजनी यादव के घर होनेवाली तीज की।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें