सोमवार, 9 अगस्त 2010

"सपना सच होने लगा है "

किसी भी देश का विकास तभी संभव है... जब वहां के लोग स्वस्थ्य हो... मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ये बात अच्छी तरह से जानते हैं... तभी तो सत्ता में आने के बाद सबसे पहले उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को ही दुरूस्त करने का काम किया...।

पांच साल पहले प्रदेश के सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कालेजों में इलाज कराना इतना आसान नहीं था, जितना आज है। पहले की तुलना में सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं में काफी सुधार हुआ है।

2005 तक हर स्वास्थ्य केंद्र में जहां औसतन सिर्फ 39 रोगी हर महीने आते थे, वहीं अब हर महीने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले रोगियों की संख्या पांच हजार से भी अधिक हो गई है....।

इतना ही नहीं सरकारी अस्पतालों में प्रसव की संख्या में भी चमत्कारिक सुधार हुआ हैं 2005-06 में जहां राज्य भर में केवल 45 हजार शिशुओं ने सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में सुरक्षित ढंग से जन्म लिया था, वहीं ऐसे खुशनसीब बच्चों की संख्या पिछले साल बारह लाख से ज्यादा हो गई....सार्वभौमिक प्रतिरक्षण कार्यक्रम के क्षेत्र में एक नये कार्यक्रम मुस्कान-एक अभियान प्रारंभ कर पूर्ण प्रतिरक्षण ग्यारह फीसदी से बढ़कर लगभग चौवन फीसदी के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है।

नवजात शिशुओं, प्रसूति माताओं के स्वास्थ्य संरक्षण और स्तनपान प्रोत्साहन हेतु ममता कार्यक्रम की शुरूआत की गई है... ममता कार्यक्रम का संचालन ठीक ढंग से हो सके इसके लिए पारम्परिक रूप से प्रसव करानेवाली रविदास समुदाय की महिलाओं का ही चयन ममता कार्यकर्ता के रूप में किया गया है।

इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टेंडर्ड के मानक के आधार पर राज्य में स्वास्थ्य उपकेंद्रो और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रो का सृजन किया जा रहा है... मध्यम दर्जे के सरकारी अस्पतालों में रोगियों के लिए रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी की मुफ्त व्यवस्था की गई है... साथ ही इन केंद्रों में ब्लड बैंक और गहन चिकित्सा केंद्र यानी की आईसीयू की स्थापना भी की गई है।

राज्य के सभी पांच सौ चौतीस प्रखंडों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित किये गये हैं... इसमें से चार सौ अस्सी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर सातो दिन चौबीसो घंटे स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं।

राज्य के चौबीस जिलों में एमएमयू यानि की मोबाईल मेडिकल यूनिट सेवा की शुरूआत हो चुकी है... और जल्द ही राज्य के सभी जिलों में एमएमयू सेवा का विस्तार कर दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया गया है ताकि मरीजों को सहायता प्राप्त करने में कोई दिक्कत न हो... इस योजना के तहत अब मरीज सरकारी अस्पताल, आईजीआईएमएस औऱ स्थानिक आयुक्त दिल्ली से सीधे सम्पर्क कर सकते हैं... इन केंद्रों से जरूररतमंदों को जरुरी सहायता तुरंत उपलब्ध कराई जाती है।

विद्यालय स्वास्थ्य परीक्षण कार्यक्रम के तहत विद्यालय में नामांकित प्रत्येक बच्चे का नियमित तैर पर स्वास्थ्य शिविर लगाकर स्वास्थ्य जांच शुरूआत की गई है... जिसके तहत जनवरी दो हजार दस तक पांच हजार सात सौ तेईस स्वास्थ्य शिविर लगाकार पांच लाख उनसठ हजार एक सौ चौंसठ बच्चों की जांच की गई।

स्वास्थ्य सेवाओं में प्राइवेट पव्लिक पार्टनरशिप के तहत डॉक्टर और पारा मेडिकल कर्मियों को अस्पताल प्रबंधन से मुक्त करने हेतु आउटसोर्सिंग की व्यवस्था भी की गई है... स्वास्थ्य प्रक्षेत्र में गुणात्मक सुधार लाने के लिए स्वास्थ्य विभाग बिहार सरकार और बिल एंड मेलिण्डा गेट्स फॉउण्डेशन के बीच एक महत्वपूर्ण करार पर हस्ताक्षर किये गये हैं।

जनसंख्या नियंत्रण हेतू राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं...और इसके लिए बिहार राज्य जनसंख्या पर्षद का गठन किया गया है... जिसके अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हैं।

रोगी को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से
102 नंबर से एक टॉल फ्री नंबर उपलब्ध कराया गया है... इस नंबर पर फोन कर किसी भी वक्त एम्बुलेंस सेवा का लाभ उठाया जा सकता है।

टॉल फ्री 108 नंबर डायल करने पर प्रदेश के लोगों के लिए आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराई गई है जो पूरी तरह से वातानुकिलित और एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस है।

इतना ही नहीं टॉल फ्री नंबर 1911 डायल करने पर हर तरह की चिकित्सकीय परामर्श मिलती है.....साथ ही साथ इसी नबर पर स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित किसी भी तरह की शिकायत भी दर्ज कराई जा सकती है।

राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को उच्चस्तरीय बनाने के लिए पीएमसीएच में पहली बार स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की शुरूआत की गई है... पीएमसीएच के अलावा जल्द ही नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल पटना और अनुग्रह नारायण मेडिकल कॉलेज अस्पताल गया में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की शुरूआत की जाएगी।

जिस प्रदेश में स्वस्थ्य सेवा पर किसी का ध्यान नहीं था... वहां के सरकारी अस्पतालों में अब चौबीस घंटे लोगों को स्वास्थ्य सेवा मिलने लगी है... लोगों को ये विश्वास हो गया है कि अब कहीं भटकने की जरूरत नहीं है...पास के सरकारी अस्पताल में किसी भी वक्त उन्हे बेहतर स्वस्थ्य सेवा मिल जाएगी....।

पिछळे पांच सालों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोगों का यही भरोसा जीता है....और लोगों के उस विश्वास को और मजबूत किया है जिस विश्वास के तहत लोगों ने उन्हें राज्य की बागडोर सौंपी थी।

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