तीन हजार साल का इतिहास.... समृद्ध संस्कृति और शानदार विरासत.... आर्यभट्ट... महावीर...गोतम बुद्द....चंद्रगुप्त मौर्य और महान अशोक... की धरती बिहार हिंदू, बौद्ध, जैन , सिक्ख और इस्लाम की पवित्र पावन भूमि, बिहार आज पूरी दुनिया के लोगों को यहां आने का निमंत्रण दे रहा है।
सत्य और अहिंसा की इस धरती पर एक बार फिर से विदेशी सैलानियों का स्वागत हो रहा है... दुनिया में शायद ही कोई ऐसा देश हो, जहां के लोग आज बिहार नहीं आ रहे हैं... नालंदा हो या राजगीर.... सासाराम हो या बोधगया..... हर पर्यटन स्थल विदेशी सैलानियों से गुलजार है।
बिहार के पर्यटन स्थल पांच साल पहले तक सूने पड़े थे... विदेशी मेहमान की बात तो दूर अपने ही प्रदेश के लोग यहां आने से कतराते थे... बिहार में पर्यटन का विकास कल्पना से परे था....।
पांच साल पहले जब लोगों ने विकास पुरूष के हाथो में प्रदेश की वागडोर सौंपी थी... तो किसी को विश्वास नहीं होता था कि महज चंद सालों में बिहार में लाखों की संख्या में विदेशी पर्यटक आने लगेंगे.... लेकिन ये सच है, आज बिहार के हर पर्यटन स्थल में विदेशी सैलानी आ रहे हैं....और यहां के आदर-सत्कार को देखकर खुशी-खुशी ढेरों यादें समेटे वापिस लौट रहे हैं...।
क्या कोई ये विश्वास करेगा कि जहां चार साल पहले महज साठ से पैंसठ हजार पर्यटक यहां आते थे, वहीं दो हजार नौ में एक करोड़ चार लाख चौदह हजार पर्यटक आए होंगे... लेकिन ऐसा हुआ है...और ये सब संभव हुआ है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी दूरदर्शिता की वजह से।
1981 में ही बिहार में पर्यटन विकास निगम का गठन कर लिया गया था... उस वक्त पर्यटन के विकास के लिए दावे भी बहुत किए गये... लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदला......ढाई दशक तक बिहार के पर्यटन स्थल पर्यटकों के लिए तरसते रहें...।
पर्यटन के क्षेत्र में बदलाव का दौर दो हजार पांच में उस वक्त शुरू हुआ जब प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार ने शपथ लिया.... पर्यटन के क्षेत्र में नई नई नीतियां बनने लगी...।
दो हजार नौ में पर्यटन नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किये गये और बिहार पर्यटन नीति दो हजार नौ अधिसूचित कई गई।
पर्यटको की सुरक्षा औऱ उनके साथ मैत्रीपूर्ण सेवा के लिए पर्यटन सुरक्षा बल का गठन का निर्णय लिया गया... हर साल बिहार दिवस मनाया जाने लगा... जिसमे बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटकों को आमंत्रित किया जाता है।
राज्य के चौंतीस जिले में जिला सूचना भवनों का निर्माण किया गया हैं...जहां से पर्यटकों को हर तरह की सूचना उपलब्ध कराई जाती है.... इतना ही नहीं राज्य के सभी सूचना भवन राजधानी पटना के मुख्यालय से वीडियो कॉन्फ्रैंसिग से जुड़े हुए हैं।
दो हजार नौ में पहली बार बिहार में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए पटना...गया... भागलपुर और मुजफ्फरपुर में बिहार फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया..।
इसी साल फरवरी में राज्य पर्यटन मंत्रालय ने केंद्र के साथ मिलकर नालंदा में बुद्धिष्ट कॉन्क्लेव का आयोजन किया...इस कॉन्क्लेव के जरिए राज्य सरकार को प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण मौका मिला।
राज्य के सबसे बड़े संग्रहालय पटना संग्रहालय का आधुनिकीकरण किया गया और यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की गई।
पटना में गंगा नदी में संचालित 48 सीटर एयरकंडीशनर फ्लोटिंग रेस्तरां पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र है।
पर्यटकों की सुविधा के लिए पटना एयरपोर्ट पर प्री पेड टैक्सी की व्यवस्था के साथ-साथ राज्य के किसी भी हिस्से में पहुंचने के लिए बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम की ओर से आधुनिक सुविधाओं वाले वोल्वो बसों का संचालन किया जाता है।
पीपीपी के अन्तर्गत पाण्डव क्रूज कंपनी के साथ एक करार किया गया है जिसके तहत गंगा में पंद्रह दिनों के लिए गंगा रिवर क्रूज का संचालन किया जाता है.... इस क्रूज के जरिए बटेश्वर स्थान से बक्सर तक गंगा में परिभ्रमण की व्यवस्था की गई है।
बिहार की होटलों मे विश्वस्तर की सुविधाएं मिल सके इसके लिए होटल प्रबंधन संस्थान, बोधगया एवं फूड क्राफ्ट इंस्टिच्यूट मुजफ्फरपुर की स्थापना की जा रही है....साथ ही बोधगया में विशेष शैक्षणिक संत्र शुरू किए गये हैं।
पर्यटन के क्षेत्र में बिहार की विशिष्ट पहचान के लिए नेशनल डिजाइनिंग सेंटर, अहमदाबाद की ओर से बिहार पर्यटन का नया लोगो और नया टैगलाईन BLISSFUL BIHAR तैयार किया गया है।
राज्य के पुरातात्विक स्थल केसरिया, मनेरशरीफ, रोहतास, एवं शेरशाह के मकबरा के विकास के लिए भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के साथ मिलकर काम किया जा रहा है।
कॉटेज इण्डस्ट्रीज इम्पोरियम ने नई दिल्ली के साथ पटना, बोधगया औऱ राजगीर में आउटलेट खोलने की योजना बनाई है ताकि यहां की कला संस्कृति को बढ़ावा मिल सके।
बिहार न तो खनिज संपदा से परिपूर्ण प्रदेश हैं औऱ न ही यहां उद्योग धंधों का पूरी तरह से विकास हुआ है.... लिहाजा राज्य सरकार ये कोशिश कर रही है कि वो पर्यटन के जरिये अपनी आमदनी बढ़ाए और इस क्षेत्र में रोजगार के नये अवसर पैदा हो....।
पर्यटन व्यवसाय में वह शक्ति है जिससे प्रदेश की तस्वीर बदल सकती है... और नीतीश सरकार भी पर्यटन के जरिए राज्य में विकास की एक इवारत लिखने की कोशिश कर रही है....।
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