शुक्रवार, 13 अगस्त 2010

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पहचानो

भारतीय लोकतंत्र ने आम आदमी को जो सबसे बड़ी नेमत दी है...वो है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता... मानव इतिहास में इससे अच्छी बात कभी नहीं हुई... अभिव्यक्ति ही वो चीज है जो आपको व्यक्ति बनाता है...यही आपको बेजुबानों से अलग करता है... इसी स्वतंत्रता का उपयोग किसी समाज के सभ्य और असभ्य होने की निशानी है।

लेकिन... भारतीय समाज में न तो कभी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सही मतलब समझा गया और न ही कभी यहां के समाज ने इसका सही इस्तेमाल किया.... ये माना की हिन्दुस्तान की अस्सी फीसदी से ज्यादा आबादी को लोकतंत्र और संविधान की सही परिभाषा नहीं मालुम....चालीस करोड़ लोग पढ़ना-लिखना नहीं जानते फिर उनसे ये उम्मीद करना कि वो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सही इस्तेमाल करेंगे गलत है....हम बात कर रहे हैं उन पढ़े लिखे लोगों की...जो लोकतंत्र...और उसके प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हैं...।

आज देश जल रहा है.... भूख से करोड़ों लोगों का पट जल रहा है.... बेरोजगारी की आग में लाखों नौजवान जल रहे हैं....भ्रष्टाचार से देश की आत्मा सिसक रही है...कॉमनवेल्थ गेम में अनियमितता की वजह देश की इज्जत तार-तार हो रही है...और इन सबके पीछे जिम्मेदारी आम लोगों की है....क्योंकि पिछले साठ साल से कभी कहीं से कोई आवाज नहीं आई कि व्यवस्था में बदलाव हो...लोकतंत्र का बेड़ा गर्क करने वालों का अंत हो....।

हमारा पवित्र पावन लोकतंत्र लकवा ग्रस्त हो गया है...अब सवाल ये उठता है कि हम और कितने दिन लकवाग्रस्त लोकतंत्र का लोकमंचन देखते रहेंगे....क्या कभी देश को भ्रष्ट, गैर जिम्मेदार और देश को बेच खाने वाले लोगों से मुक्ती मिलेगी..।

अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार कहा था कि भारतीय लोकतंत्र खोखला हो चुका है... इसका बाहरी खोल भले ही ठीक दिखता हो, पर अंदर से दीमकों ने इसे जर्जर कर दिया है....अटल बिहारी वाजपेयी ने सही कहा था कि लोकतंत्र जर्जर हो गया है...क्योंकि लोकतंत्र को जर्जर बनाने वाले दीमक ने आम आदमी की सोच को चाट खाया है...अब आम आदमी को सिर्फ अपने परिवार... और अपनी जिम्मेदारियों से मतलब नहीं है...देश से किसी को कोई मतलब नहीं।

आज चाहिए था कि देश को विकसित बनाने के लिए जनता जागती..देश के लिए उठ खड़ी होती... लेकिन भारतीय जनता तो उस फलसफे पर चल रही है... कि देश के लिए मरना अच्छी बात है...लेकिन कोई और मरे ये ज्यादा अच्छी बात है... अब ये कोई और.... कौन होगा कोई नहीं जानता...ये कोई औऱ जब तक नहीं आ जाता तबतक भारतीय लोकतंत्र की आत्मा यू ही सिसकती रहेगी।

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