क्या हो रहा है इस देश में.... गांव, शहर, प्रदेश, देश की राजधानी, और विदेश भी.... अब तो गिनती ही कम पड़ने लगी है....किस की बात करे और किसकी छोड़ दे कुछ समझ में नहीं आता.... इतनी तो पब्लिक वेलफेयर के लिए सरकारी योजनाएं तक नहीं बनी... कोई ऐसा क्षेत्र नहीं बचा जहां ये दावा किया जा सके कि सब पाक साफ है....।
यहां कुछ भी पाक नहीं है....अंधेर गर्दी मची है, जिसके हाथ में जो आया वो अपने पॉकेट में डाल रहा है.... दूसरों का हक मारकर भी अपनी जेब भर सके तो कोई बात नहीं भरी जा रही है....।
टू जी और कॉमनवेल्थ गेम्स के घोटाले होंगे बड़े-बड़े लेकिन हम आज जिस घोटाले की बात करेंगे....उस घोटाले की वजह से 273 पंचायत के सैकड़ों गांव में अंधेरा छा गया है...सूरज की रोशनी जब ढल जाती है तो इन गांवों की गलियों में अंधेरा छा जाता है.... सीतामढ़ी के लाखों लोगों के पास जो कुछ है उसी से ये प्रदेश की विकास में योगदान देते हैं.... लेकिन वहां से जो पैसा इनके घर चिराग जलाने के लिए आया वो मुखिया से लेकर डीडीसी तक हजम कर गये....।
सोचा था गांव के मुखिया हैं....अंधेरा दूर करेंगे.... बीडीओ साहब बराबर गांव आते है और भरोसा दिलाते हैं कि हर समस्या दूर होगी... डीडीसी बड़े अधिकारी हैं...उन्हें भी इनकी परेशानी पता होगी....लेकिन क्या करे ये गांव वाले... मुखिया से लेकर डीडीसी तक सभी ने इनकी किस्मत को अंधेरे से भर दिया.....गांव में जिन्हें रौशनी लानी थी....उसी ने रौशनी का घोटाला कर लिया।
गांव गांव में फैले उजियारा... इसके लिए सरकार की तरफ से सोलर लैम्प लगाए जाने थे.... लेकिन ज्यादातर गांवों में सोलर लैम्प लगाए ही नहीं गये और जहां लगाए भी गये हैं....वो सब डूप्लीकेट...जी हां डूप्लीकेट।
पंचायतों के मुखिया, पंचायत समिति, जिला स्तर पर जिला परिषद, विधायक और सांसद की अनशंसा पर जहां भी सोलर लैम्प लगाए गये हैं उनमें गड़बड़ी की बात सामने आई है... सोलर लैम्प में गड़बड़ी की बात सामने आने के बाद इस मामले की जांच की जा रही है।
उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी..... और पुलिस उपाधीक्षक शशिशंकर कुमार रौशनी के इस घोटाले की जांच कर रहे हैं.... इसके लिए सोलर लैम्प से जुड़ी सभी जानकारियों के साथ सभी सोलर लैम्प उपकरण की जांच की जा रही है...।
अब तक 166 पंचायत से 2-2 सोलर प्लेट और बैट्री को जब्त किया जा चुका है... जबकि 92 पंचायत में सोलर सिस्टम को जब्त करने की तैयारी चल रही है... इसके लिए 12 दिसम्बर तक का समय दिया गया है।
सरकारी राशी के गबन और मामले की लीपापोती के इस मामले में 500 से भी ज्यादा लोग जांच के दायरे में हैं....जिसमें 273 पंचायत के मुखिया और सचिव सहित विधायक और सांसद भी शामिल हैं।
रोशनी के जिस घोटाले की जांच हो रही है... उस घोटाले के पर्दाफास की कहानी भी आश्चर्यजनक है....सीतामढ़ी पुलिस के हाथ एक ऐसा शख्स लगा जो शहर में पिछले दिनों हुए बम विस्फोट में शामिल था...जब सीतामढ़ी की पुलिस ने इस शख्स से पुछताछ शुरू हुई तो उसने एक ऐसा बम फोड़ दिया जिसके धमाके से सभी के होश उड़ गये.... ये धमाका था...एक घोटाले की...रौशनी के घोटाले की.... इस घोटाले में गांव के मुखिया से लेकर डीडीसी तक शामिल थे।
पच्चीस करोड़ जी हां एक छोटे से जिले सीतमढ़ी में अगर पच्चीस करोड़ का कोई घोटाला हो तो सबके होश उड़ेंगे ही.... द्वादस वित्त आयोग की तरफ से जो टाटा बीपी का सोलर सिस्टम लगाया जाना था....जिसकी कीमत करीब पैंतालीस हजार है.....लेकिन इनलोगों ने टी बीपी के नाम से डूप्लीकेट सोलर सिस्टम लगाया...जिसकी बाजार में कीमत 17,000 से भी कम बैठती है...।
यानी हर सिस्टम के लिए 28 हजार से भी ज्यादा की धांधली हुई है....इस शख्स ने ये भी बताया कि इस 28,000 की इस रकम में मुखिया के लिए 10,000....बीडीओ और डीडीसी के दफ्तर के लिए 15.000 रूपये की कमीशन तय थी... जबकि ऑफिस कलर्क को अळग से कमीशन मिलता था।
रौशनी के घोटाले के इस खेल में जमकर फर्जीवाड़ा हुआ है.... टाटा वीपी के नाम पर टी वीपी का सिस्टम लगाया गया.... साथ ही एक्साइड का जो बैट्री लगा है वो भी डुप्लीकेट है... पूरे जिले में इन सोलर सिस्टम की सप्लाई 54 सप्लायरों ने किया है....जो जांच के घेरे में हैं..... टाटा जैसी कंपनी के प्रोडक्ट की कॉपी कर डुप्लीकेट प्रोडक्ट बनाया गया है....लिहाजा इस कंपनी के एक्सपर्ट अब डुप्लीकेट की जांच कर रहे हैं....।
फिलहाल सीतामढ़ी जिले में 7 हजार 500 सोलर लाइट लगे हैं...गांव घर की गलियों से लेकर थाने और समाहरणालय में भी ये सोलर लेम्प लगे हुए हैं....ये सोलर लाइट एमपी कोटे, विधायक कोटे, जिलापार्षद कोटे की ओर से लगाए गये हैं... आपको बता दे कि हर एमपी के पास 50 सोलर सिस्टम का विधायक के पास 25 सोलर सिस्टम का और जिलापार्षद के पास 100 सोलर लाइट का कोटा है....और इसी कोटे से इन सोलर लैम्पों का वितरण हुआ है।
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