बुधवार, 2 मार्च 2011

ये किसान चाची...


हालात, बदलते और जीरो से हीरो बनने की कहानी मुश्किल ज़रूर होती है....लेकिन असंभव सी दिखनी वाली कहानी भी इसी जमीन पर कभी-कभी हकीकत का रूप लेती है...।

राजकुमारी, जो अब किसान चाची है। कछ साल पहले तक उसके सितारे गर्दिश में थे और उसे जाननेवाला-पहचानने वाला कोई नहीं था। ससुराल वाले ने घर का बंटवारा कर दिया और एक एकड़ जमीन के भरोसे दो-दो बच्चों की जिम्मेदारी उस पर सौंप दी.....पति कुछ करते नहीं थे और वह अनपढ़ थी...लिहाजा अपनी किस्मत को कौंसने के सिवाय उसके पास कोई और रास्ता नहीं था..।

लेकिन, कहते हैं न हौसला गर बुलंद हो तो पत्थर भी पानी बन जाता है....राजकुमारी के भी हौसले कुछ ऐसे ही बुलंद थे...उन्नीस साल की उम्र में शादी हुई थी... पच्चीस तक आते-आते दो-दो बच्चों की मां बन गई थी....सास ने जब घर का बंटवारा किया तो राजकुमारी ने सबसे पहले मायके जाकर मै्ट्रीक की परीक्षा पास की ताकि वो अपने और अपने बच्चों का भविष्य संवार सके...।

जो एक एकड़ जमीन मिली थी, उसी पर राजकुमारी ने पहले पहल पपीते और अदरक की खेती शुरू की....शुरू में खेत में काम करना आसान नहीं था....लेकिन धीरे-धीरे राजकुमारी को इसकी आदत हो गई....राजकुमारी की मेहनत रंग लाने लगी और एक एकड़ जमीन से ही उसकी अच्छी खासी आमदनी होन लगी।

राजकुमारी की लगन और जुनून को सबसे पहले सरैया प्रखंड में कृषि वैज्ञानिक केंद्र पर काम करने वाली वैज्ञानिक ज्योति सिन्हा ने पहचाना था.....और उन्हें प्रशिक्षण लेने के लिए राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, पूसा भेज दिया....जब राजकुमारी पूसा से प्रशिक्षण लेकर वापिस लौटी तो वह अपनी कोशिशों के बल पर पपीते, लीची, गुलाब से अलग-अलग प्रोडक्ट्स बनाने लगीं, जो कृषि-प्रदर्शनियों का हिस्सा बनने लगे......... सालों की अथाह मेहनत के बाद राजकुमारी के प्रोडक्ट्स की मांग प्रदेश स्तर पर होने लगी...।

आज राजकुमारी पचपन साल की हो गई है लेकिन हर रोज तीस से चालीस किलोमीटर का सफर साइकिल से तय करती है...साइकिल पर गांव गांव जाकर अपने जैसे किसानों को खेती के गुर सिखाने का ये सिलसिला पिछले बीस साल से लगातार जारी है....।

आसपास के कई जिले के लोग राजकुमारी को किसान चाची के नाम से जानते हैं....किसान चाची लोगों को अचार, मुरब्बा, सॉस जैसी खाद्य सामग्री बनाने का प्रशिक्षण भी देती है....आज आनंदपुर गांव में एक दो नहीं छत्तीस-छत्तीस सहायता समुह है....जहां 350 महिलाएं बकरी, मुर्गी, भैंस और मधुमक्खी पालन जैसे उद्योगों से जुड़ कर खुद को आर्थिक रूप से मजबूत बना रही हैं...।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी किसान चाची की लगन और मेहनत के कायल हैं....तभी तो उनसे मिलने के लिए वो आनंदपुर तक आ पहुंचे थे....और उन्होंने ये घोषणा की किसान चाची के बनाए हुए अचार, मुरब्बा, जैम, जेली को अब सुधा डेयरी प्रदेश के घर-घर तक पहुंचाएगी।

आज जब देश के लाखो किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं....ऐसे में राजकुमारी ऊर्फ किसान चाची बिहार ही नहीं पूरे देश के किसानों के लिए एक रोल मॉडल बन गई है..... जिससे सीख लेकर हिन्दुस्तान के किसानों की किस्मत बदल सकती है.....और हर किसान खुशहाल हो सकता है....।

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