यासनाया
आओ लौट चलें...उस चमकदार पथ पर जो जंगल की ओर लौटता है।
शनिवार, 23 अप्रैल 2011
तुम्हारा ‘’इकरारनामा’’
मैं मांगता हूं कविता से
तुम्हारा
‘’
इकरारनामा
’’
ये जानते हुए भी कि
मेरी कलम बांझ है
इससे सिर्फ कागजों का गर्भपात होगा ।
तुम्हारे अंतर में कभी भी
मेरे शब्दों को जगह नसीब नहीं होगी
फिर भी मांगता हूं इन बेमतलब शब्दों से
तुम्हारा
‘’
इकरारनामा
’’
।।
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