सोमवार, 16 मई 2011

कुंवारेपन की अग्निपरीक्षा


उसी की होगी शादी, जो देगा कुंवारेपन की, अग्निपरीक्षा। जी हां, ये कोई मजाक नहीं है बिल्कुल सच है...आइए आपको भी कराते हैं उस सच्चाई से रूबरू....जिसके बारे में शायद ही आप कुछ जानते हो..।

ये भीड़ लगी हुई है मुंगेर जिले का रामनगर थाना के गौरीपुर गांव में....आज यहां उमानाथ पासवान के बेटे वरूण की अग्निपरीक्षा होगी....और अगर वो इस परीक्षा में सफल हो गया तो शादी के लिए बारात निकलेगी...। 

इससे पहले की हम आपको ये बताएं कि ये अग्निपरीक्षा कैसे होती है....उससे पहले आपको हम ये बताते हैं कि ये अग्निपरीक्षा होती क्यों है....और उसकी शुरूआत कैसे हुई....।

बात सालों पुरानी है....मोकामा में एक बाबा चौहरमल हुआ करते थे....जिनके पास औलाद की चाहत में वैसी महिलाएं आया करती थी जो निहसंतान थी....बाबा की प्रसिद्धी दूर-दूर तक थी....और उनके दरवाजे से शायद ही कोई खाली हाथ लौटता था...। 

बाबा चौहरमल का आशिर्वाद देने का तरीका कुछ अलग था...उनके यहां पांच फिट लंबाई का एक आग का दरिया था...और वहां आने वाली हर औरत को उस अग्निकुंड से पैदल गुजरना पड़ता था....तब जाकर बाबा उसे आशिर्वाद देते थे....लेकिन इस आशिर्वाद के साथ-साथ एक शर्त भी थी...और वो शर्त थी कि जब होने वाले संतान की शादी होगी तब उसकी मां को अपने बेटे के कुंवारेपन की अग्निपरीक्षा देनी होगी... उसे फिर से वैसे ही अग्निकुंड से नंगे पैर गुजरना होगा....अगर पैर सलामत रहा तो शादी मंगलमय होगी... नहीं तो उस घर में अमंगल का दौर शुरू हो जाएगा....।

उसी वक्त से इस खास जाति में अग्निपरीक्षा की प्रथा शुरू हो गई जो आजतक बदस्तूर जारी है.... खैर ये तो थी सदियों पुरानी बात....अब आज की कहानी देखिये....उमानाथ पासवान के बेटे की शादी होनी है...लिहाजा उसे अग्निपरीक्षा देनी होगी...।

आग का दरिया तैयार किया जा चुका है....उसमें वक्त-वक्त पर घी और लकड़िया डाली जा रही है ताकि उसकी लपटें कम न हो...हजारो लोग दिल थामे इस अग्निपरीक्षा को देखने के लिए सांसे थामे खड़े हैं...क्या होगा...क्या ये अग्निपरीक्षा सफल हो पाएगा...और इस घर में शहनाई बजेगी...या फिर दुल्हे की होगी किरकिरी...लगेंगे उस पर तोहमत।

परंपरा के मुताबिक सबसे पहले भगत महाराज आग का दरिया पार करेंगे....और फिर वो बांस के बने मचान पर खड़े होकर दुल्हे की मां को अग्निपरीक्षा के लिए बुलाएंगे...अब देखिए आ रही दुल्हे की मां जो देगी अपने बेटे के कुंवारेपन के लिए अग्निपरीक्षा...गौर से देखिए इस अग्निपरीक्षा को......।
....... कुछ नहीं हुआ दुल्हे की मां को...वो ठीक है....उसके पैर में छाले नहीं पड़े....यानि लड़का कुंवारा है.....भगत ने बांस में लगे फल भी लोगों को प्रसाद के तौर पर बांट दिए हैं....यानि अब यहां सब मंगल ही मंगल है....यानी अब उमानाथ के घर से बारात निकल सकती है....अब उस घर में खुशियों के गीत गाए जा सकते हैं...।

विश्वास, आस्था या अंधविश्वास....जो कुछ भी कहें इसे....लेकिन ये एक ऐसी परंपरा है...जो औरतों के साथ-साथ पुरूषों के लिए भी उतने ही पवित्र होने की बात करता है...जितना ये समाज किसी लड़की से उसके पवित्र होने की आशा रखता है..।

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