अजीब बात है ! आप भी कहेंगे मुझे पढ़ने के बाद.... “मुझे” इसलिए क्योंकि शब्दों में ढलता मैं ही हूं। यहां हर शब्द का अर्थ मैं ही हूं....पन्नों पर उतरा हुआ हर मुस्कराहट मैं हूं, दर्द से भीगा हुए सफे का हर हिस्सा मैं हूं। जी हां यहां सबकुछ मैं ही हूं।
और, अगर आप इन शब्दों की गहराइयों को समझ पाएंगे, उसे महसूस कर पाएंगे तो यकीन मानिए आपकी उस फिलिंग्स का मतलब भी, मैं ही हूं। इसलिए तो मैंने कहा कि अजीब लगेगा आपको मुझे पढ़ने के बाद।
“निराशावादी” इस शब्द का मतलब मैं कभी समझ नहीं पाया... हां, आशावादी होने का मतलब भी मेरे दिमाग ने कभी मंजूर नहीं किया। आशा और निराशा दोनों जिंदगी रुपी सिक्के के दो पहलू होंगे जिसका एक ही हिस्सा दिखाई देता है और दूसरा नजरों से औझल। जिंदगी जब भी उछाल मारती है- ये सिक्का कभी इस पट कभी उस पट... और. जब जिंदगी का सिक्का खड़ा हो जाता है तो इंसान भी दो राहे पर खड़ा हो जाता है। .इसी दोराहे की बात है- सोच यहीं आकर शब्दों का रूप लेती है, यहीं आकर जिंदगी से मोहब्बत करने को दिल करता है और यहीं आकर जिंदगी बेमतलब हो जाती है और मौत सबसे बेहतर उपाय नजर आने लगता है।
“मोहब्बत” नाम से ही इसकी नफासत झलकती है। इस शब्द से ही संसार की रचना हुई, मोह-माया का जन्म हुआ, हर रिश्ता इसी डोर से बंधा है। इसके बिना कुछ नहीं.... इतना समझता हूं मैं। लेकिन फिर भी मोहब्बत है कि हमेशा लगता है इसके अधूरे अर्थ से वाकिफ हूं मैं। इसका पूरा अर्थ तो कभी समझा ही नहीं मैंने। काश इसका अर्थ मैं समझ पाता, या कोई होता जो मुझे समझा पाता..... इतना भी नहीं तो कम से कम मेरे अंतस में जो है उसे ही मुझे दिखा देता और कहता ये देख मोहब्बत इसी को कहते है।
मोहब्बत की बात छोड़िए... इसके बारे में मैं नहीं जानता। मां-बाप, भाई-बहन और नाते-रिश्तेदारों के प्यार से अच्छी तरह वाकिफ हूं....फिर भी कुछ है जिसका अर्थ, नहीं मालूम। वही अर्थ ढूंढ़ता हूं मैं। इसलिए मैंने पहले ही कहा था अजीब लगेगा आपको मुझे पढ़ने के बाद। अजीब बात ही है, अब देखिए न मैं लिखना तो कुछ और चाहता हूं, दिल में कुछ और है लेकिन लिख क्या रहा हूं ? इसी दर्द की बात करता हूं मैं, जिससे तकलीफ भी होती है और कुछ पता भी नहीं चलता। ऊपर से सब ठीक लगता है, लेकिन अंदर एक तूफान है, बेआवाज सा। इस तूफान का शोर मैं सुन सकता हूं.....मेरे जैसे हजारो, लाखों लोग इस तूफान के झंझावतों में घिरे हैं। क्या इसी तूफान के दर्द को वो मोहब्बत कहते हैं जिसकी मुझे या मेरे जैसे लाखों लोगोंको जरूरत है। लगता है शायद हां, ये मोहब्बत जिंदगी की हो सकती है, मौत की हो सकती है...या किसी ऐसे चीज की जिसके लिए दिल में तो तड़प है पर उसके लिए कोई शब्द नहीं है..... आप मुझे पढ़कर अंदाजा लगा सकते हैं, महसूस कर सकते हैं....इसलिए तो कहा मैंने अजीब लगेगा आपको इस बेतरतीब सी लिखावट लेकिन मतलब सी चीज को पढ़कर....मुझे पढ़कर।
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